कविता - तुम आओगे !

तुम आओगे !

सपनों ने  सौगंध दिलाई है, 

मैं आंसुओं को सूखने न दूंगी 

तुम्हारा अजस्र नयन जल से 

अभिषेक करूंगी,

मेरा शकुन बार-बार कहता है 

तुम अवश्य आओगे  ! 

किसी तरह की तुम्हें पथ बाधा न हो 

तुलसीचौरा दीप को स्नेहसित्त रखूंगी 

दिश दिशाओं  आलोक बिखेरूंगी,

मुझे परिपूर्ण करने मेरे सर्वस्व तुम 

अविलम्ब आओये!

हिय का भरपूर अमिय रस 

तुम्हारे आने तक मैं,

संजित संजोए रखूंगी, तुम्हारे लिए 

हमदम मेरे तुम आओगे.... 

तुम्हें आना ही होगा। 




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