भारत में /in India

भारत में स्त्री की सामाजिक स्थिति और उसकी स्वतंत्रता का इतिहास ?

स्त्री की सामाजिक स्थिति और उसकी स्वतंत्रता में सिथरता का अभव हमारे इतिहास से जुड़ा है ऐतिहासिक को मुद्दे को समझें तो स्री स्वतंत्रता मुख्यत : दो पड़ावो से गुजरती है | 

पहला ..... स्त्रियों के दमन का दौर 

दूसरा ..... उनकी आजादी का दौर 

दोयम दर्जे के इस समाज में कभी स्री के अधिकारों और उसकी स्वतंत्रता का हनन हुआ तो कभी उसे देवी का रूप मन कर उसकी पूजा की गई | वैदिक काल में स्री की अपेक्षा पुरषों को ज्यादा महत्व मिलता था किन्तु स्री की शिक्षा पुरषों को शिक्षा के समान थी | स्त्री को वेद और ललित कलाओं में शिक्षा लेने की पूरी अनुमति थी | शिक्षा ही नहीं, स्त्री को अपना वर चुनने का भी पूरा अधिकार था | महाभारत और रामायण कल में स्त्री का स्थान ऊंचा था | राजनैतिक विषयों में स्त्री की हिस्सेदारी अहम मानी जाती थी बौद्धिक कल में उन्हें अपना संघ बनाने की आजादी थी | मध्य काल में स्त्री की स्वतंत्रता पर अवरोध देखने को मिलते हैं, जिसके तहत शिक्षा, गुलामी की बड़ियां पहननी पड़ी | स्त्रियों के लिए पर्दा प्रथा के शुरआत ऐसी दौर में हुई | बाल - विवाह और सती प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों की जकड़ रहा हमारा समाज | इसके बाद पंद्रहवी शताब्दी में तुलसी, कबीर चैतन्य, नानक, मीरा और रामदास जैसे संतो ने धार्मिक कार्यो में स्त्रियों की सहभागिता के लिए संघर्ष किया, जिससे न ही स्त्रियों की बौद्धिक क्षमता का विकास हुआ, बल्कि उसकी आर्थिक सिथतियोंमें भी काफी सुधर देखने को मिला | 

 

 History of the social status of women and its independence in India?The social status of the woman and the ablation of severity in its independence is related to our history, to understand the historical issue, freedom of independence passes through two stops.First .....Second ... the stage of their independenceIn this society of two-dimension, once the rights and freedom of the woman were violated, then she was worshiped and worshiped as Goddess. In the Vedic period, men were more important than women, but education of women was similar to education. The woman had complete permission to take education in the Vedas and the fine arts. Not only education, the woman had the right to choose her own. The woman's position in the Mahabharata and Ramayana was high. The share of women in political subjects was considered to be important, in the intellectual tomorrow, they had the freedom to form their own union. In the Middle Ages, there is a barrier on the freedom of women, under which education, slavery should be worn. The curtain custom for women started in such a period. Our society is clinging to social evils like child marriage and sati practices. After this Santas like Tulsi, Kabir Chaitanya, Nanak, Meera and Ramdas fought in the fifteenth century for the participation of women in religious activities, nor did the intellectual capacity of women develop, but also found a significant improvement in its economic conditions. |

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